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Shehzada Movie Review in Hindi

Shehzada Movie Review in Hindi


एक्शन- एंटरटेनर की यूएसपी हैं कार्तिक आर्यन

"अब वनवास खत्म, घर लौटने का वक्त आ गया है.." शहजादा कहता है। ये सुनते ही अनायास ही दिमाग में पिछली देखी फिल्म की झलक दौड़ आई, "अब पठान के वनवास का टाइम खत्म"। खैर, शहजादा उन फिल्मों में हैं, जो आपको एकबारगी एंटरटेन करती है। इसमें एक्शन है, ड्रामा है, रोमांस है। कार्तिक आर्यन ने अपने अभिनय के दम से फिल्म को काफी सपोर्ट दिया है। हम एक अभिनेता के तौर पर उन्हें हर फिल्म के साथ ऊपर उठते देख रहे हैं, जो कि सराहनीय है।



भूल भुलैया 2 की बेमिसाल सफलता और फ्रेडी में तारीफें पाने के बाद, कार्तिक शहजादा के साथ बतौर फिल्म प्रोड्यूसर भी नई शुरुआत कर रहे हैं। बता दें, यह अल्लू अर्जुन की "अला वैकुंठपुरमूलू" की ऑफिशियल हिंदी रीमेक है, हालांकि कहानी में थोड़ी बहुत तब्दीली की गई है।

कहानी 

बंटू (कार्तिक आर्यन) की किस्मत उसके जन्म के साथ ही बदल जाती है, जब वाल्मीकि उपाध्याय पैदा होते ही अपने बेटे को बंटू से बदल देता है। जिंदल परिवार का शहजादा बंटू दिल्ली के किसी गरीब मोहल्ले में जिंदगी गुजार रहा होता है, जबकि वाल्मीकि का बेटा राज शहजादा बनकर जिंदल परिवार की वारिस की तरह पलता- बढ़ता है। वाल्मीकि यह खेल क्यों खेलता है, इसके पीछे भी एक कहानी है। बहरहाल, नौकरी की तलाश में बंटू की मुलाकात समारा (कृति सैनन) से होती है, दोनों में कुछ मुलाकातें होती हैं, और फिर प्यार हो जाता है। इधर एक दिन अचानक बंटू को अपनी सच्चाई का पता चल जाता है कि वो असल में कौन है। ऐसे में क्या वो अपने नकली पिता वाल्मीकि को कभी माफ कर पाएगा? वह किन परिस्थितियों में अपने माता-पिता (रोनित रॉय और मनीषा कोइराला) से मिलता है? वाल्मीकि बंटू को अपने परिवार से दूर क्यों रखते हैं? इन्हीं सवालों के इर्द गिर्द घूमती है फिल्म की कहानी।



कहना गलत नहीं होगा कि ये पूरी फिल्म कार्तिक आर्यन के कंधों पर ही टिकी है। वो अपने किरदार में काफी अच्छे लगे हैं। कॉमेडी दृश्य हों या ड्रामा या एक्शन, कार्तिक ने हर फ्रेम में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है। वो फिल्म की यूएसपी है। कृति सैनन और कार्तिक का रोमांटिक एंगल दिलचस्प लगा है। लेकिन कृति के किरदार पर और काम किया जा सकता था। परेश रावल अपने किरदार में काफी जंचे हैं, वो आपके दिल में नफरत पैदा करने में सफल होते हैं। सनी हिंदुजा, रोनित रॉय और सचिन खेडेकर ने भी अच्छा काम किया है। वहीं, मनीषा कोईराला जैसी दिग्गज अभिनेत्री को फिल्म में गिने चुने दृश्य ही मिले हैं। राजपाल यादव चंद मिनटों के लिए स्क्रीन पर आते हैं, लेकिन हंसाकर जाते हैं।


शहजादा की पटकथा में कॉमेडी, रोमांस, फैमिली ड्रामा, एक्शन सब कुछ है, लेकिन बांधे रखने में चूकती है। फिल्म के फर्स्ट हॉफ में जहां रोमांस पर ज्यादा फोकस किया गया था, सेकेंड हॉफ यह एक फैमिली फिल्म बनकर रह गई है। फिल्म के संवाद भी काफी औसत हैं। वहीं, किरदारों के गहनता पर भी और काम किया जाना चाहिए था। फिल्म देखकर कहा जा सकता है कि निर्देशक ने एक मसाला एंटरटेनर बनाने के चक्कर में पटकथा को काफी ढ़ीला छोड़ दिया है।
तकनीकी स्तर पर फिल्म औसत है। खासकर रितेश सोनी की ए़डिंटिंग निराशाजनक है। फिल्म का एक दृश्य से दूसरे दृश्य पर जाना आपको खटकेगा। वहीं, प्रोडक्शन डिजाइन, जिस पर फिल्म का अच्छा खासा बजट गया है, बिल्कुल पक्ष में काम नहीं करता है। साथ ही फिल्म की एक्शन कोरियोग्राफी में भी कुछ नयापन नहीं है। स्लो मोशन में एक्शन सीक्वेंस अब कहीं ना कहीं ऊबाते हैं।
फिल्म के सभी गाने प्रीतम ने कंपोज किये हैं और लिरिक्स लिखे हैं कुमार, मयूर पुरी, श्लोक लाल और आईपी सिंह ने। हालांकि, इस फिल्म में गाने कहानी की प्रवाह और सहजता को तोड़ती हैं। कैरेक्टर ढ़ीला 2.0, सलमान खान की रेडी के गाने का रीमिक्स है, जिसे कार्तिक ने अपने स्टाइल में पेश किया है।
कार्तिक आर्यन स्टारर शहजादा एक मसाला एंटरटेनर है। जहां काफी ड्रामा है, एक्शन है, रोमांस है, गानें हैं.. लेकिन पटकथा के स्तर पर फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। फिल्म भावनात्मक तौर पर हमसे नहीं जुड़ पाती है। यदि आप कार्तिक आर्यन के फैन हैं, तो फिल्म एक बार सिनेमाघर में जाकर जरूर देंखे। 'शहजादा' को Movie Lover की ओर से 3 स्टार।

निर्देशक- रोहित धवन कलाकार- कार्तिक आर्यन, कृति सैनन, परेश रावल, मनीषा कोईराला, रोनित रॉय, राजपाल यादव, सनी हिंदुजा, सचिन खेडेकर, अंकुर राठी


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